वक्त ने वक्त को वक्त से देखा
झूठी इन हाथों की लकीरों को बड़े सख्त से देखा
पढ़ पाया न खुद इनको
जब वक्त को हाथों से फिसलते देखा ।।
लफ़्ज़ों को लफ़्ज़ों से लफ़्ज़ों का नया राग मिल जाता है
फिर दिलों का ऐसा अल्फ़ाज़ बन जाता है
नज़रों से नज़रों का एक ख्वाब बन जाता है
जब आती है भवार तो ये घमासान बन जाता है ।।