दो लब्ज़ खत के लिख कर
कहीं मुकर न जाना
कि तुम उम्मीद बने हो किसी की
यूहीं कहीं बिखर न जाना ।।
कि सिमट जाना बाहों में
क्या में वाकिफ नहीं हूं धडकनों से
समझो इसे कि तुम ख्याल ये इश्क़ हो किसी का
अब फिर कहीं और मत बरस जाना ।।

दो लब्ज़ खत के लिख कर
कहीं मुकर न जाना
कि तुम उम्मीद बने हो किसी की
यूहीं कहीं बिखर न जाना ।।
कि सिमट जाना बाहों में
क्या में वाकिफ नहीं हूं धडकनों से
समझो इसे कि तुम ख्याल ये इश्क़ हो किसी का
अब फिर कहीं और मत बरस जाना ।।
