बस दो दिन की ही तो थी
इसको भी तूने न जाने किसके हवाले कर दिया
बस धोखा है
भरम है
इस दुनियां का यही चलन है।।
रोते हैं लोग यहां
अपने ही मज़ा लेते हैं
वे बेवजह की पगडंडियों पे खुद को ही सज़ा देते हैं
रिश्तों से भरी इस जिंदगी को खिलौनों सा खेलते हैं
इंसान कहां हम तो हेवानों से बोलते हैं ।।