खुली आंखों में पला
सुख़ और दुःख से परे
अनभिज्ञ बुलबुला है प्यार ।।
मदमस्त ख़्वाबों में खोया हुआ
हकीक़त से बिल्कुल अज्ञान
विचित्रता से भरा
स्वेत श्लोक है प्यार ।।
गहराइयों की हद तक
जो ना बुझे वो तलब तक
इंतजार की आरज़ू तक
विश्वास की कसौटी तक
तनहाई में हमसफ़र सा है प्यार ।।