Poetrex

तितर बितर सा बिखरा बिखरानग्न कड़ सुख साभरम इन आंखों का।। मोह विरह सी कोठारीछलक गई जो अंजुरी कल बेसुध नींद में तेरीदोष लगा हस्त रे ख कोअब क़िस्मत काहे करत है तांडव ।। उलझाकर लब्जो का ताना Yबस अधकुचले से एम्तहन कुछ सेश रहे ।।

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खुली आंखों में पला सुख़ और दुःख से परे अनभिज्ञ बुलबुला है प्यार ।। मदमस्त ख़्वाबों में खोया हुआ हकीक़त से बिल्कुल अज्ञान विचित्रता से भरा स्वेत श्लोक है प्यार ।। गहराइयों की हद तक जो ना बुझे वो तलब तक इंतजार की आरज़ू तक विश्वास की कसौटी तक तनहाई में हमसफ़र सा है प्यारContinue reading “Poetrex”

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अतिशें प्यार की जल के ख़ाक हो गई बातें वो इश्क़ की अब आम हो गईं ।। हर कोई है जिस्म का दीवाना सच्ची मोहब्बत का कहां ठिकाना आह……… प्यार तो बस एक अहसास है फिर करता कोई क्यों ऐसा खिलवाड़ है ।। पीता है कोई क्यों आंखों से सबाव फिर शम्मा भी शरमा जातीContinue reading “Poetrex”

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तितर बितार सा बिखरा – बिखरा नग्न कड़ ” सुख ” सा भरम इन आंखों का ।। मोह विरह सी कोठारी छलक गई जो अंजुरी कल बेसुध नींद में तेरी दोस लगा हस्त – रेख़ को अब क़िस्मत करत है तांडव ।। उलझाकर लफ़्ज़ों का ताना – बाना अधकुचले से एम्तहन कुछ शेष रहे ।।

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