Dear felling, please be quite ……Because there is no need of you ……Where I’m going .
Category Archives: poetry
Poetrex
तितर बितार सा बिखरा – बिखरा नग्न कड़ ” सुख ” सा भरम इन आंखों का ।। मोह विरह सी कोठारी छलक गई जो अंजुरी कल बेसुध नींद में तेरी दोस लगा हस्त – रेख़ को अब क़िस्मत करत है तांडव ।। उलझाकर लफ़्ज़ों का ताना – बाना अधकुचले से एम्तहन कुछ शेष रहे ।।
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वक्त ने वक्त को वक्त से देखा झूठी इन हाथों की लकीरों को बड़े सख्त से देखा पढ़ पाया न खुद इनको जब वक्त को हाथों से फिसलते देखा ।। लफ़्ज़ों को लफ़्ज़ों से लफ़्ज़ों का नया राग मिल जाता है फिर दिलों का ऐसा अल्फ़ाज़ बन जाता है नज़रों से नज़रों का एक ख्वाबContinue reading “Poetrex”
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Gum huye Hain Lifafe kahin Ankhon Mai n Jane kesi kasak Baki hai abhi Kuch to hai Jo Dil ke karib hai Lamhan lamhan Kuch to chuta sa hai Jo hakikat ke are hai Kal bhi thi aur AJ bhi hai Chahte eshk ki eltiza Dar agar bichadne Ka na hota Najane kab se eshkContinue reading “Poetrex”
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अब ढूंढ रहे हैं दीप उजाले निशब्द स्वेत स्मृति से व्याख्या जैसे चल रही है मौन इशारे करतब सी ।। बैठी – बैठी कोस रही है आढी – तिरछी हस्त रेख को जीवन उल्लेख आ-वर्डित सा कर्म भविष्य के है प्रधान ।। धन प्रेम और वस्त्र सब मोह मया फिर काहे छलकत आंसू रात अंधेरेContinue reading “Poetrex”
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