Dear felling, please be quite ……Because there is no need of you ……Where I’m going .
Category Archives: poem
Poetrex
तितर बितार सा बिखरा – बिखरा नग्न कड़ ” सुख ” सा भरम इन आंखों का ।। मोह विरह सी कोठारी छलक गई जो अंजुरी कल बेसुध नींद में तेरी दोस लगा हस्त – रेख़ को अब क़िस्मत करत है तांडव ।। उलझाकर लफ़्ज़ों का ताना – बाना अधकुचले से एम्तहन कुछ शेष रहे ।।
Poetrex
वक्त ने वक्त को वक्त से देखा झूठी इन हाथों की लकीरों को बड़े सख्त से देखा पढ़ पाया न खुद इनको जब वक्त को हाथों से फिसलते देखा ।। लफ़्ज़ों को लफ़्ज़ों से लफ़्ज़ों का नया राग मिल जाता है फिर दिलों का ऐसा अल्फ़ाज़ बन जाता है नज़रों से नज़रों का एक ख्वाबContinue reading “Poetrex”