Poetrex

अतिशें प्यार की जल के ख़ाक हो गई बातें वो इश्क़ की अब आम हो गईं ।। हर कोई है जिस्म का दीवाना सच्ची मोहब्बत का कहां ठिकाना आह……… प्यार तो बस एक अहसास है फिर करता कोई क्यों ऐसा खिलवाड़ है ।। पीता है कोई क्यों आंखों से सबाव फिर शम्मा भी शरमा जातीContinue reading “Poetrex”

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तितर बितार सा बिखरा – बिखरा नग्न कड़ ” सुख ” सा भरम इन आंखों का ।। मोह विरह सी कोठारी छलक गई जो अंजुरी कल बेसुध नींद में तेरी दोस लगा हस्त – रेख़ को अब क़िस्मत करत है तांडव ।। उलझाकर लफ़्ज़ों का ताना – बाना अधकुचले से एम्तहन कुछ शेष रहे ।।

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वक्त ने वक्त को वक्त से देखा झूठी इन हाथों की लकीरों को बड़े सख्त से देखा पढ़ पाया न खुद इनको जब वक्त को हाथों से फिसलते देखा ।। लफ़्ज़ों को लफ़्ज़ों से लफ़्ज़ों का नया राग मिल जाता है फिर दिलों का ऐसा अल्फ़ाज़ बन जाता है नज़रों से नज़रों का एक ख्वाबContinue reading “Poetrex”

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अब ढूंढ रहे हैं दीप उजाले निशब्द स्वेत स्मृति से व्याख्या जैसे चल रही है मौन इशारे करतब सी ।। बैठी – बैठी कोस रही है आढी – तिरछी हस्त रेख को जीवन उल्लेख आ-वर्डित सा कर्म भविष्य के है प्रधान ।। धन प्रेम और वस्त्र सब मोह मया फिर काहे छलकत आंसू रात अंधेरेContinue reading “Poetrex”

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